Wednesday, 21 September 2016

इतिहास और भूगोल

इतिहास और भूगोल

हरियाणा का इतिहास बड़ा गौरवपूर्ण है और यह वैदिक काल से आरंभ होता है। यह राज्‍य पौराणिक भरत वंश की जन्‍मभूमि माना जाता है जिसके नाम पर इस देश का नाम भारत पड़ा। हमारे महान महाकाव्‍य महाभारत में हरियाणा की चर्चा हुई है। भारत की राजधानी बनने से पहले तक भारत के इतिहास में मुसलमानों के आगमन और दिल्‍ली के भारत की राजधानी का एक हिस्‍सा बन गया और 1857 में स्‍वतंत्रता के प्रथम महासंग्राम से पूर्व तक यह गुमनाम बना रहा। सन् 1857 के विद्रोह को कुचलने के बाद जब ब्रिटिश प्रशासन फिर से स्‍थापित हुआ तो झज्‍झर और बहादुरगढ़ के नवाबों, बल्‍लभगढ़ के राजा तथा रिवाड़ी के राव तुलाराम की सत्‍ता छीन ली गई। उनके क्षेत्र या तो ब्रिटिश क्षेत्रों में मिला लिए गए या पटियाला, नाभा और जींद के शासकों को सौंप दिए गए। इस तरह हरियाणा पंजाब प्रांत का हिस्‍सा बन गया। एक नवंबर, 1966 को पंजाब के पुनर्गठन के बाद हरियाणा पूर्ण बन गया।
हरियाणा के पूर्व में उत्तर प्रदेश, पश्चिम में पंजाब, उत्तर में हिमाचल प्रदेश और दक्षिण में राजस्‍थान है। राष्‍ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्‍ली हरियाणा से जुड़ा है। राष्‍ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्‍ली के दायरे में हरियाणा भी है।
कृषि हरियाणा की 56 प्रतिशत से अधिक जनसंख्‍या की जीविका का आधार कृषि है और राज्‍य के सकल घेरेलू उत्‍पाद में कृषि का योगदान 26.4 प्रतिशत है। खाद्यान्‍न, जो हरियाणा के राज्‍य के समय 25.92 लाख टन था, वर्ष 2008-09 में बढ़कर 155.08 लाख हो जाने का अनुमान है क्‍योंकि ज्‍यादा फसलें बोई जार रही हैं और मुख्‍य फसलों का उत्‍पादन बढ़ रहा है। चावल, गेहूं, ज्‍वार, मक्‍का, जौ, गन्‍ना, कपास, दलहन, तिलहन और आलू राज्‍य की प्रमुखता से उगाई जाने वाली फसलें हैं। सूरजमुखी तथा सोयाबीन, मूंगफली तथा बागवानी को भी विशेष प्रोत्‍साहन दिया जा रहा है। राज्‍य में गहन और विस्‍तृत खेती को बढ़ावा देने के प्रयास जारी हैं। मृदा उर्वरता रखने के लिए ढेंचा, मूंग को भी बढ़ावा दिया जा रहा है।
HARYANA POLICE CUTT OFF

सूचना प्रौद्योगिकी

दुनिया भर में चल रही वैश्‍वीकरण की प्रक्रिया में सूचना प्रौद्योगिकी के महत्‍व को देखते हुए हरियाणा सरकार ने सूचना प्रौद्योगिकी की नई व्‍यापक नीति तैयार की है ताकि राज्‍य नई सदी में विकास की ओर अग्रसर हो। इसके अंतर्गत सूचना प्रौद्योगिकी, आई.टी. ई.एस./बी.पी.ओ. उद्योग को प्रोत्‍साहन देने का प्रावधान है। सरकार ने हाल ही में टेक्‍नोलॉजी पार्को के लिए भी एक नीति घोषित की है। इस नीति का उदृदेश्‍य सूचना प्रौद्योगिकी को नैनो प्रौद्योगिकी, जैव प्रौद्योगिकी, मोबाइल कंप्‍यूटिंग और रोबोटिक्‍स से जोड़ना है। राज्‍य सरकार टेक्‍नोलॉजी पार्क, साइबर सिटी तथा आईटी कॉरीडोर की स्‍थापना के लिए लाइसेंस जारी कर रही है। फरवरी 2007-अप्रैल 2008 तक ऐसी 72 परियोजनाओं को सैद्धंतिक मजूरी दी गई, इससे लगभग तीन लाख आईटी पेशेवरों को रोजगार मिलेगा। इसके अलावा गुड़गांव को सूचना प्रौद्योगिकी और आई.टी.ई.एस./बी.पी.ओ. दोनों कंपनियों के लिए वरीयता प्राप्‍त निवेश गंतव्‍य के रूप में विकसित किया गया है। अब गुड़गांव भारत में कारपोरेट दुनिया की योजना बना रही है। इसमें सूचना प्रौद्योगिकी/आई.टी.ई.एस./बी.पी.ओ. होंगे जो विश्‍वस्‍तरीय सुविधाएं प्रदान करेंगे। गुड़गांव के अलावा, सरकार कुंडली-मानेसर-पलवल एक्‍सप्रेस हाईवे और फरीदाबाद के पास के राष्‍ट्रीय राजधानी क्षेत्र के क्षेत्रों को विकसित करने पर विचार कर रही है। ये गुड़गांव-मानेसर मेगा आई.टी. हब के उपग्रह का काम करेंगे। वर्ष 2007-08 में लगभग 18000 करोड़ रुपए के सॉफ्टवेयर का निर्यात हुआ।
सरकार राज्‍य भर में ई-दिशा एकल सेवा केंद्र के नाम से 1,159 ग्रामीण और 104 शहरी सामान्‍य सेवा केंद्र स्‍थापित कर रही है। स्‍थापना का काम शुरू किया जा चुका है। ग्रामीण क्षेत्रों में 100 प्र‍तिशत औरा शहरी क्षेत्रों में 67 प्रतिशत काम हो चुका है। अस समय कंप्‍यूटर प्रशिक्षण, ई'टिकटिंग, मोबाइल रिचार्ज, जाब प्‍लेसमेंट सेवा, इंटरनेट सार्फिग, डी.टी.पी. जैसी बिजनेस (बी2सी) सेवाएं इन केंद्रों से दी जा रही है सरकार इन केद्रों से बस के पास, बिजली के बिल वसूलने, नकल (भूमि रिकार्ड) जारी करने अनु. जाति/पिछड़ी जाति/निवास जन्‍म/मृत्‍यु प्रमाण पत्र जारी करने और नए राशन कार्ड जारी करने जैसे गवर्मेंट टु सिटिजन्‍स (जी 2सी) सेवाएं प्रदान करने पर विचार कर रही है।
राज्‍य सरकार अपने कर्मचारियों की शत-प्रतिशत कंप्‍यूटर साक्षरता के लिए आईटी साक्षरता योजना शुरू कर रही है। इसके तह‍त मुख्‍यालय तथा जिला मुख्‍यालय में आईटी प्रशिक्षण प्रयोगशालाएं स्‍थापित की गई है। अब तक लगभग 24000 कर्मचारियों को प्रतिक्षण दिया जा चुका है। इसके अतिरिक्‍त केंद्र सरकार ने राज्‍य के शहरी तथा ग्रामीण इलाकों में महिलाओं तथा अनुसूचित जाति/जनजाति के लोगों को कंप्‍यूटर प्रशिक्षण उपलब्‍ध कराने के लिए 44.36 लाख रुपए के प्रस्‍ताव की मंजूरी दी है। इस कार्यक्रम के तहत दस जिलों में 800 महिलाओं/बलिकाओं को कंप्‍यूटर प्रशिक्षण दिया गया।

उद्योग

हरियाणा का औद्योगिकी आधार विशाल है राज्‍य में 1,343 और मंझोली तथा 80,000 लघु उद्योग इकाइयां हैं। हरियाणा में हर चीज का उत्‍पादन होता है। हरियाणा कारों, ट्रैक्‍टरों, मोटरसाइकिलों, साइकिलों, रेफ्रिजरेटरों, वैज्ञानिक उपकरणों आदि का सबसे बड़ा उत्पादक है।
हरियाणा विश्‍व बाजार में बासमती चावल का सबसे बड़ा निर्यातक है। पचरंगा अचार के अलावा पानीपत की हथकरघे की बनी वस्‍तुएं और कालीन विश्‍व भर में प्रसिद्ध हैं।
जुलाई, 1991 से अब तक 13,914 औद्योगिकी उ़द्यमी ज्ञापन जमा किए गए जिनमें से 2,274 ज्ञापन लागू कर दिए गए हैं। इससे मई, 2008 तक 24,034 करोड़ रुपए का निवेश हुआ और 4,02,129 लोगों को रोजगार मिला। नई औद्योगिक नीति के परिणामस्‍वरूप विशेष आर्थिक क्षेत्र (सेज) स्‍थापित करने के 100 प्रस्‍ताव राज्‍य को मिले हैं जिसके अनुसार औद्योगिकी ढाचे पर 2 करोड़ रुपए की लागत आएगी। इन परियोजनाओं के क्रियान्‍वयन के बाद कई हजार करोड़ रुपए का औद्योंगिकी निवेश और हजारों लोगो को रोजगार मिलेगा। राज्‍य सरकार गुड़गांव में आईएमटी मानेसर के विस्‍तार के अलावा खरखोदा, फरीदाबाद, रोहत‍क और जगाधरी में औ़द्योगिकी आदर्श नगर विकसित कर रही है। पानीपत में 33,000 करोड़ रुपए के निवेश से पैट्रो-रसायन केंद्र स्‍थापित कर लिया है। 2,000 करोड़ रुपए की लागत से कुंडली-मानेसर-पलवल एक्‍सप्रेस राजमार्ग विकसित किया जा रहा है। इससे राजमार्ग के आसपास अनेक आर्थिक केंद्र बनेंगे जिससे औद्योगिक और सेवा क्षेत्र में निवेश के अनेक अवसर उपलब्‍ध होंगे।
हरियाणा राज्‍य औद्योगिक विकास निगम और हरियाणा नगर विकास प्रधिकरण द्वारा विकसित औद्योगिकी संपदाओ में भूमि आवंटन हेतु उद्योगों की बहुत मांग है। वर्तमान सरकार के कार्यकाल में 98 बड़ी और मझोंली तथा 7,683 लघु औद्योगिक इकाइयां स्‍थापित हुई हैं जिन पर 2,744 करोड़ रुपए का निवेश हुआ 1,25747 लोगो को रोजगार मिला है। इसके अलावा अनेक औद्योगिक इकाइयों का विस्‍तार किया गया है जिसके फलस्‍वरूत 35,000 करोड़ रुपए से अधिक का नया निवेश हुआ है। हाल ही में भारतीय तेल निगम ने पानीपत में 5,000 करोड़ रुपए के निवेश से पैरेक्‍सीलीन/पीटीए की स्‍थापना की है। मारूति उद्योग, हीरो हौंडा और अनेक ऑटोमोबाइल उद्योगों में विस्‍तार हुआ है जिन पर लगभग 10,000 करोड़ रुपए की लागत आई है। इस समय औद्योगिक क्षेत्र में 70,000 करोड़ रुपए के निवेश प्रस्‍तावों को क्रियान्वित किया जा रहा है।

सिंचाई

पूरे राज्‍य में सिंचाई और पेयजल के समान वितरण के लिए सरकार 354 करोड़ रुपए की लागत की 109 किलोमीटर लंबी विशाल नहर भाखड़ा मुख्‍य नहर-हांसी शाखा-बुटाना शाखा बहुद्देशीय संपर्क नहर का निर्माण कर रही है।
मानसून के मौसम में यमुना नदी के अतिरिक्‍त पानी को इस्‍तेमाल करने के लिए 267 करोड़ रुपए की अनुमानित लागत वाली दादपुर-शाहाबाद-वाल्‍वी नहर परियोजना शुरू की है। इसके तहत यमुना नगर, अंबाला और कुरूक्षेत्र में पड़ने वाले 92,532 हेक्‍टेयर क्षेत्र की सिंचाई और भूजल रिचार्ज सुविधाओं के लिए 590 क्‍यूसेक अतिरिक्‍त जल का उपयोग किया जाएगा।
सरकार ने घग्घर और इसकी सहायक नदियों पर चार कम ऊंचाई के बांध – कौशल्या बांध , दंग्राना बांध, दीवानवाला बांध और छामला बांध – परियोजनाओं को स्वीकृति प्रदान की है| इन पर क्रमशः 180 करोड, 63.69 करोड, 132.70 करोड़ तथा 20.41 करोड़ रुपयों की लागत आएगी और इससे न केवल मानसून में पानी के बेकार बहने को रोका जा सकेगा बल्कि बाढ़ से संपत्ति को होने वाला नुकसान भी रोका जा सकेगा |

बिजली

हरियाणा देश का ऐसा पहला राज्‍य है जहां 1970 में सभी गांवों में बिजली दी गई थी। सन 1966 में राज्‍य में राज्‍य में 20,000 नलकूप थे जिनकी संख्‍या मार्च 2008 में बढ़कर 4.51 लाख हो गई है। बिजली की औसत दैनिक उपलब्‍धता 2007-08 में 7.23 करोड़ यूनिट हो गई है। बिजली उपभोक्‍तओं की संख्‍या 2007-08 में 42.70 लाख हो गई है 31 मार्च, 2009 तक बिजली स्‍थापित उत्‍पादन क्षमता 4,636.23 मेगावाट थी।

परिवहन

सड़कें: सड़कें हरियाणा में सभी गांव पक्‍की सड़कों से जुड़े हैं। राज्‍य में सड़कों की कुल लंबाई 34,772 किलोमीटर है।
रेलवे: कालका, अंबाला, कुरूक्षेत्र, रोहतक, जींद, हिसार, अंबाला, पानीपत और जखाल यहां के प्रमुख रेलवे स्‍टेशनों में से है। जगाधारी शहर में रेलवे की एक वर्कशॉप है।
उड्डयन: हरियाणा में असैनिक हवाई अड्डे-हिसार, करनाल, पिंजौर, नारनौल और भिवानी में हैं।

पर्यटन स्‍थल


हरियाणा सूरज कुंड मेला
पर्यटन स्‍थल हरियाणा में 44 पर्यटक परिसर हैं। प्रमुख पर्यटन केंद्रों मं ब्‍लू जे (समालखा), स्‍काईलार्क (पानीपत), चक्रवर्ती झील और ओएसिस (उचाना), पराकीट (पीप्ली), किंगफिशर (अंबाला), मैगपाई (फरीदाबाद), दबचिक (होडल), जंगल बबलर (धारूहेड़ा), रेड विशप (पंचकुला) और बड़खल झील, सुल्‍तानपुर पक्षी विहार (सुल्‍तानुपर, गुड़गांव), दमदमा (गुड़गांव) और चीड़ वन के लिए प्रसिद्ध मोरनी हिल्‍स पर्यटकों के रूचि के कुछ अन्‍य केंद्र है। सूरजकुंड का विश्‍वप्रसिद्ध शिल्‍प मेला हर वर्ष फरवरी में आयोजित किया जाता है। इसी तर‍ह पिंजौर की प्राचीन विरासत को बढ़ावा देने के लिए पिंजौर विरासत उत्‍सव प्रतिवर्ष बनाया जाता है।

Tuesday, 29 December 2015

इतिहास और भूगोल

इतिहास और भूगोल

हरियाणा का इतिहास बड़ा गौरवपूर्ण है और यह वैदिक काल से आरंभ होता है। यह राज्‍य पौराणिक भरत वंश की जन्‍मभूमि माना जाता है जिसके नाम पर इस देश का नाम भारत पड़ा। हमारे महान महाकाव्‍य महाभारत में हरियाणा की चर्चा हुई है। भारत की राजधानी बनने से पहले तक भारत के इतिहास में मुसलमानों के आगमन और दिल्‍ली के भारत की राजधानी का एक हिस्‍सा बन गया और 1857 में स्‍वतंत्रता के प्रथम महासंग्राम से पूर्व तक यह गुमनाम बना रहा। सन् 1857 के विद्रोह को कुचलने के बाद जब ब्रिटिश प्रशासन फिर से स्‍थापित हुआ तो झज्‍झर और बहादुरगढ़ के नवाबों, बल्‍लभगढ़ के राजा तथा रिवाड़ी के राव तुलाराम की सत्‍ता छीन ली गई। उनके क्षेत्र या तो ब्रिटिश क्षेत्रों में मिला लिए गए या पटियाला, नाभा और जींद के शासकों को सौंप दिए गए। इस तरह हरियाणा पंजाब प्रांत का हिस्‍सा बन गया। एक नवंबर, 1966 को पंजाब के पुनर्गठन के बाद हरियाणा पूर्ण बन गया।
हरियाणा के पूर्व में उत्तर प्रदेश, पश्चिम में पंजाब, उत्तर में हिमाचल प्रदेश और दक्षिण में राजस्‍थान है। राष्‍ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्‍ली हरियाणा से जुड़ा है। राष्‍ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्‍ली के दायरे में हरियाणा भी है।
कृषि हरियाणा की 56 प्रतिशत से अधिक जनसंख्‍या की जीविका का आधार कृषि है और राज्‍य के सकल घेरेलू उत्‍पाद में कृषि का योगदान 26.4 प्रतिशत है। खाद्यान्‍न, जो हरियाणा के राज्‍य के समय 25.92 लाख टन था, वर्ष 2008-09 में बढ़कर 155.08 लाख हो जाने का अनुमान है क्‍योंकि ज्‍यादा फसलें बोई जार रही हैं और मुख्‍य फसलों का उत्‍पादन बढ़ रहा है। चावल, गेहूं, ज्‍वार, मक्‍का, जौ, गन्‍ना, कपास, दलहन, तिलहन और आलू राज्‍य की प्रमुखता से उगाई जाने वाली फसलें हैं। सूरजमुखी तथा सोयाबीन, मूंगफली तथा बागवानी को भी विशेष प्रोत्‍साहन दिया जा रहा है। राज्‍य में गहन और विस्‍तृत खेती को बढ़ावा देने के प्रयास जारी हैं। मृदा उर्वरता रखने के लिए ढेंचा, मूंग को भी बढ़ावा दिया जा रहा है।

सूचना प्रौद्योगिकी

दुनिया भर में चल रही वैश्‍वीकरण की प्रक्रिया में सूचना प्रौद्योगिकी के महत्‍व को देखते हुए हरियाणा सरकार ने सूचना प्रौद्योगिकी की नई व्‍यापक नीति तैयार की है ताकि राज्‍य नई सदी में विकास की ओर अग्रसर हो। इसके अंतर्गत सूचना प्रौद्योगिकी, आई.टी. ई.एस./बी.पी.ओ. उद्योग को प्रोत्‍साहन देने का प्रावधान है। सरकार ने हाल ही में टेक्‍नोलॉजी पार्को के लिए भी एक नीति घोषित की है। इस नीति का उदृदेश्‍य सूचना प्रौद्योगिकी को नैनो प्रौद्योगिकी, जैव प्रौद्योगिकी, मोबाइल कंप्‍यूटिंग और रोबोटिक्‍स से जोड़ना है। राज्‍य सरकार टेक्‍नोलॉजी पार्क, साइबर सिटी तथा आईटी कॉरीडोर की स्‍थापना के लिए लाइसेंस जारी कर रही है। फरवरी 2007-अप्रैल 2008 तक ऐसी 72 परियोजनाओं को सैद्धंतिक मजूरी दी गई, इससे लगभग तीन लाख आईटी पेशेवरों को रोजगार मिलेगा। इसके अलावा गुड़गांव को सूचना प्रौद्योगिकी और आई.टी.ई.एस./बी.पी.ओ. दोनों कंपनियों के लिए वरीयता प्राप्‍त निवेश गंतव्‍य के रूप में विकसित किया गया है। अब गुड़गांव भारत में कारपोरेट दुनिया की योजना बना रही है। इसमें सूचना प्रौद्योगिकी/आई.टी.ई.एस./बी.पी.ओ. होंगे जो विश्‍वस्‍तरीय सुविधाएं प्रदान करेंगे। गुड़गांव के अलावा, सरकार कुंडली-मानेसर-पलवल एक्‍सप्रेस हाईवे और फरीदाबाद के पास के राष्‍ट्रीय राजधानी क्षेत्र के क्षेत्रों को विकसित करने पर विचार कर रही है। ये गुड़गांव-मानेसर मेगा आई.टी. हब के उपग्रह का काम करेंगे। वर्ष 2007-08 में लगभग 18000 करोड़ रुपए के सॉफ्टवेयर का निर्यात हुआ।
सरकार राज्‍य भर में ई-दिशा एकल सेवा केंद्र के नाम से 1,159 ग्रामीण और 104 शहरी सामान्‍य सेवा केंद्र स्‍थापित कर रही है। स्‍थापना का काम शुरू किया जा चुका है। ग्रामीण क्षेत्रों में 100 प्र‍तिशत औरा शहरी क्षेत्रों में 67 प्रतिशत काम हो चुका है। अस समय कंप्‍यूटर प्रशिक्षण, ई'टिकटिंग, मोबाइल रिचार्ज, जाब प्‍लेसमेंट सेवा, इंटरनेट सार्फिग, डी.टी.पी. जैसी बिजनेस (बी2सी) सेवाएं इन केंद्रों से दी जा रही है सरकार इन केद्रों से बस के पास, बिजली के बिल वसूलने, नकल (भूमि रिकार्ड) जारी करने अनु. जाति/पिछड़ी जाति/निवास जन्‍म/मृत्‍यु प्रमाण पत्र जारी करने और नए राशन कार्ड जारी करने जैसे गवर्मेंट टु सिटिजन्‍स (जी 2सी) सेवाएं प्रदान करने पर विचार कर रही है।
राज्‍य सरकार अपने कर्मचारियों की शत-प्रतिशत कंप्‍यूटर साक्षरता के लिए आईटी साक्षरता योजना शुरू कर रही है। इसके तह‍त मुख्‍यालय तथा जिला मुख्‍यालय में आईटी प्रशिक्षण प्रयोगशालाएं स्‍थापित की गई है। अब तक लगभग 24000 कर्मचारियों को प्रतिक्षण दिया जा चुका है। इसके अतिरिक्‍त केंद्र सरकार ने राज्‍य के शहरी तथा ग्रामीण इलाकों में महिलाओं तथा अनुसूचित जाति/जनजाति के लोगों को कंप्‍यूटर प्रशिक्षण उपलब्‍ध कराने के लिए 44.36 लाख रुपए के प्रस्‍ताव की मंजूरी दी है। इस कार्यक्रम के तहत दस जिलों में 800 महिलाओं/बलिकाओं को कंप्‍यूटर प्रशिक्षण दिया गया।

उद्योग

हरियाणा का औद्योगिकी आधार विशाल है राज्‍य में 1,343 और मंझोली तथा 80,000 लघु उद्योग इकाइयां हैं। हरियाणा में हर चीज का उत्‍पादन होता है। हरियाणा कारों, ट्रैक्‍टरों, मोटरसाइकिलों, साइकिलों, रेफ्रिजरेटरों, वैज्ञानिक उपकरणों आदि का सबसे बड़ा उत्पादक है।
हरियाणा विश्‍व बाजार में बासमती चावल का सबसे बड़ा निर्यातक है। पचरंगा अचार के अलावा पानीपत की हथकरघे की बनी वस्‍तुएं और कालीन विश्‍व भर में प्रसिद्ध हैं।
जुलाई, 1991 से अब तक 13,914 औद्योगिकी उ़द्यमी ज्ञापन जमा किए गए जिनमें से 2,274 ज्ञापन लागू कर दिए गए हैं। इससे मई, 2008 तक 24,034 करोड़ रुपए का निवेश हुआ और 4,02,129 लोगों को रोजगार मिला। नई औद्योगिक नीति के परिणामस्‍वरूप विशेष आर्थिक क्षेत्र (सेज) स्‍थापित करने के 100 प्रस्‍ताव राज्‍य को मिले हैं जिसके अनुसार औद्योगिकी ढाचे पर 2 करोड़ रुपए की लागत आएगी। इन परियोजनाओं के क्रियान्‍वयन के बाद कई हजार करोड़ रुपए का औद्योंगिकी निवेश और हजारों लोगो को रोजगार मिलेगा। राज्‍य सरकार गुड़गांव में आईएमटी मानेसर के विस्‍तार के अलावा खरखोदा, फरीदाबाद, रोहत‍क और जगाधरी में औ़द्योगिकी आदर्श नगर विकसित कर रही है। पानीपत में 33,000 करोड़ रुपए के निवेश से पैट्रो-रसायन केंद्र स्‍थापित कर लिया है। 2,000 करोड़ रुपए की लागत से कुंडली-मानेसर-पलवल एक्‍सप्रेस राजमार्ग विकसित किया जा रहा है। इससे राजमार्ग के आसपास अनेक आर्थिक केंद्र बनेंगे जिससे औद्योगिक और सेवा क्षेत्र में निवेश के अनेक अवसर उपलब्‍ध होंगे।
हरियाणा राज्‍य औद्योगिक विकास निगम और हरियाणा नगर विकास प्रधिकरण द्वारा विकसित औद्योगिकी संपदाओ में भूमि आवंटन हेतु उद्योगों की बहुत मांग है। वर्तमान सरकार के कार्यकाल में 98 बड़ी और मझोंली तथा 7,683 लघु औद्योगिक इकाइयां स्‍थापित हुई हैं जिन पर 2,744 करोड़ रुपए का निवेश हुआ 1,25747 लोगो को रोजगार मिला है। इसके अलावा अनेक औद्योगिक इकाइयों का विस्‍तार किया गया है जिसके फलस्‍वरूत 35,000 करोड़ रुपए से अधिक का नया निवेश हुआ है। हाल ही में भारतीय तेल निगम ने पानीपत में 5,000 करोड़ रुपए के निवेश से पैरेक्‍सीलीन/पीटीए की स्‍थापना की है। मारूति उद्योग, हीरो हौंडा और अनेक ऑटोमोबाइल उद्योगों में विस्‍तार हुआ है जिन पर लगभग 10,000 करोड़ रुपए की लागत आई है। इस समय औद्योगिक क्षेत्र में 70,000 करोड़ रुपए के निवेश प्रस्‍तावों को क्रियान्वित किया जा रहा है।

सिंचाई

पूरे राज्‍य में सिंचाई और पेयजल के समान वितरण के लिए सरकार 354 करोड़ रुपए की लागत की 109 किलोमीटर लंबी विशाल नहर भाखड़ा मुख्‍य नहर-हांसी शाखा-बुटाना शाखा बहुद्देशीय संपर्क नहर का निर्माण कर रही है।
मानसून के मौसम में यमुना नदी के अतिरिक्‍त पानी को इस्‍तेमाल करने के लिए 267 करोड़ रुपए की अनुमानित लागत वाली दादपुर-शाहाबाद-वाल्‍वी नहर परियोजना शुरू की है। इसके तहत यमुना नगर, अंबाला और कुरूक्षेत्र में पड़ने वाले 92,532 हेक्‍टेयर क्षेत्र की सिंचाई और भूजल रिचार्ज सुविधाओं के लिए 590 क्‍यूसेक अतिरिक्‍त जल का उपयोग किया जाएगा।
सरकार ने घग्घर और इसकी सहायक नदियों पर चार कम ऊंचाई के बांध – कौशल्या बांध , दंग्राना बांध, दीवानवाला बांध और छामला बांध – परियोजनाओं को स्वीकृति प्रदान की है| इन पर क्रमशः 180 करोड, 63.69 करोड, 132.70 करोड़ तथा 20.41 करोड़ रुपयों की लागत आएगी और इससे न केवल मानसून में पानी के बेकार बहने को रोका जा सकेगा बल्कि बाढ़ से संपत्ति को होने वाला नुकसान भी रोका जा सकेगा |

बिजली

हरियाणा देश का ऐसा पहला राज्‍य है जहां 1970 में सभी गांवों में बिजली दी गई थी। सन 1966 में राज्‍य में राज्‍य में 20,000 नलकूप थे जिनकी संख्‍या मार्च 2008 में बढ़कर 4.51 लाख हो गई है। बिजली की औसत दैनिक उपलब्‍धता 2007-08 में 7.23 करोड़ यूनिट हो गई है। बिजली उपभोक्‍तओं की संख्‍या 2007-08 में 42.70 लाख हो गई है 31 मार्च, 2009 तक बिजली स्‍थापित उत्‍पादन क्षमता 4,636.23 मेगावाट थी।

परिवहन

सड़कें: सड़कें हरियाणा में सभी गांव पक्‍की सड़कों से जुड़े हैं। राज्‍य में सड़कों की कुल लंबाई 34,772 किलोमीटर है।
रेलवे: कालका, अंबाला, कुरूक्षेत्र, रोहतक, जींद, हिसार, अंबाला, पानीपत और जखाल यहां के प्रमुख रेलवे स्‍टेशनों में से है। जगाधारी शहर में रेलवे की एक वर्कशॉप है।
उड्डयन: हरियाणा में असैनिक हवाई अड्डे-हिसार, करनाल, पिंजौर, नारनौल और भिवानी में हैं।

पर्यटन स्‍थल


हरियाणा सूरज कुंड मेला
पर्यटन स्‍थल हरियाणा में 44 पर्यटक परिसर हैं। प्रमुख पर्यटन केंद्रों मं ब्‍लू जे (समालखा), स्‍काईलार्क (पानीपत), चक्रवर्ती झील और ओएसिस (उचाना), पराकीट (पीप्ली), किंगफिशर (अंबाला), मैगपाई (फरीदाबाद), दबचिक (होडल), जंगल बबलर (धारूहेड़ा), रेड विशप (पंचकुला) और बड़खल झील, सुल्‍तानपुर पक्षी विहार (सुल्‍तानुपर, गुड़गांव), दमदमा (गुड़गांव) और चीड़ वन के लिए प्रसिद्ध मोरनी हिल्‍स पर्यटकों के रूचि के कुछ अन्‍य केंद्र है। सूरजकुंड का विश्‍वप्रसिद्ध शिल्‍प मेला हर वर्ष फरवरी में आयोजित किया जाता है। इसी तर‍ह पिंजौर की प्राचीन विरासत को बढ़ावा देने के लिए पिंजौर विरासत उत्‍सव प्रतिवर्ष बनाया जाता है।

सामान्य ज्ञान हरियाणा-संस्कृति



बरही/नेजू- कुएं से पानी खींचने की मोटी रस्सी| 
दोघड- सिर पर ऊपर नीचे एक साथ दो घड़े| 
पनिहारन-कुएं से पानी लाने वाली|
पनघट- वह सार्वजानिक कुआं जहाँ से पीने का पानी लाया जाता था|
सूड़- खेत में हल चलाने से पहले की जाने वाली कटाई-छंटाई| 
न्याणा- गाय का दूध निकालने के पूर्व उसके पिछले पैरों को बांधने का रस्सा| 
नेता- हाथ से दूध बिलोने की रई को घुमाने वाला रस्सा| 
नांगला- रई को सीधी रखने के लिए डाले जाने वाले दो रस्से | 
कढावणी- हारे में दूध गर्म करने का मटका| 
बिलोवना/बिलोवनी- दूध बिलोने के लिए प्रयोग होने वाला मटका| घीलडी- घी डालने का मिटटी का पात्र | जमावनी- दूध जमाने का मटका | 
जामण- दूध ज़माने के लिए डाली जाने वाली छाछ | 
रई- दूध बिलोने का लकड़ी का यन्त्र| 
हारी- कपडे या घास से बना गोल घेरा जिस पर गर्म बर्तन रखा जाता था| 
हारा- गोबर के कंडे (उपले) जलाकर कुछ पकाने का स्थान | 
बांठ/ चाट- पकाकर पशुओं को डाली जानी वाली खाद्य सामग्री, जैसे बिनोले, ग्वार, चने आदि| 
गोस्से/उपले/पाथिये- गोबर के कंडे| 
कोठला- अनाज डालने का मिटटी का बड़ा पात्र| 
कोठली- अनाज डालने का मिटटी का छोटा पात्र 
कूप/ बूंगा- चारा डालने का सरकंडों/ घासफूस से बना ढांचा| 
मन्जोली- मुज़ की गठरी| मूंज- सरकंडों में से निकला गया वह हिस्सा जिससे रस्सी बनती है| 
मोगरी- मूंज. फसल आदि को कूटने की मोटी लकड़ी| 
खाट- चारपाई| 
प्लाण- गाडी में जोतने से पहले ऊंट की पीठ पर रखा जाने वाला एक लकड़ी का ढांचा | 
कजावा- ऊंट की पीठ पर रखकर सामान धोने का एक साधन, जिसे प्लाण पर रखा जाता था| 
राछ-  औजार | 
कूंची- ऊंट की सवारी करने के लिए उसके ऊपर रखा जाने वाला एक ढांचा| 
बींड- ऊंट को हल में जोतने के लिए प्रयोग होने वाला रस्सों का जाल | 
जुआ/जूडा- ऊंट अथवा बैल को हल में जोतने के लिए प्रयोग होने वाला लकड़ी का ढांचा| 
कुस/फाल- हल में प्रयोग होने वाला लोहे का उपकरण  | 
ओरना- बिजाई के काम आने वाला बांस से बना एक उपकरण | 
बिजंडी- बीज डालने का थैला या अन्य पात्र| 
हलसोतिया- बिजाई शुरू करने के दिन का उत्सव|| 
हाली- हल चलाने वाला| पंजवाल- खेत में पानी देने वाला| 
पाली- पशु चराने वाला|
चीड़स- चमड़े का एक पात्र जिससे कुएं से पानी निकाला जाता था| 
पूली- फसल की कटाई से समय कुछ मात्र के एक साथ बांधे गए पौधे | 
दुबका- ऊंट या किसी अन्य पशु के पैरों को बांधना ताकि वह भाग न सके| 
झावली- मिटटी का एक पात्र, जिसमें सामान डालते थे| 
झावला- दूध गर्म करने के मटके (कढ़ावनी) को ढकने का मिटटी का पात्र जिसमें भाप निकलने को छेद होते थे| 
मांडना- गेरू या रंगों से दीवारों पर की जाने वाली चित्रकारी| 
साथिये- स्वस्तिक आदि | 
कुंडा- मिटटी का एक पात्र जिसमें आटा गूंथा जाता था| 
कुलडा- मिटटी का मटके जैसा छोटा पात्र, जो पानी लस्सी आदि डालने के काम आता था| 
कुलड़ी- कुलडे से छोटे आकर का पात्र| 
सिकोरा- मिटटी का एक बर्तन| 
बरवा- मिट्टी का एक बर्तन | 
सीठना- दामाद को गीत के रूप में दी जाने वाली गालियाँ | 
खोड़िया- एक नृत्य | 
बटेऊ- दामाद 
लनीहार- दुल्हन को लेने आया मेहमान| 
बधाण- ऊंट/बैल गाडी, ट्रक्टर ट्राली या ट्रक आदि में लादे गए सामान को बांधने का रस्सा 
सांकल- दरवाजे की कुण्डी| 
चूरमा- मोटी रोटी का चूरा बनाकर उसमें घी डालकर बनाया गया व्यंजन| 
लापसी- आटे को भूनकर उसमें मीठा पानी मिलाकर बनाया गया गाढा व्यंजन| 
पांत/सीरा- आटे को भूनकर उसमें मीठा पानी मिलाकर बनाया गया पतला व्यंजन 
कसार/पंजीरी - आटे को भूनकर उसमें मीठा मिलकर बनाया गया सूखा पाउडर | 
सत्तू- भूने हुए जौ का आटा| बिजणा- हाथ से हवा करने का पंखा| पंखी- हाथ से हवा करने की घूमने वाली पंखी| टोकनी- पीतल का घड़ा| 
झाल/मौण- मिटटी का घड़े से बड़े आकार का बर्तन| 
सुराही- लम्बी गर्दन और बीच में पानी निकालने के छेड़ युक्त घड़े के आकर का मिटटी का पात्र| 
गिर्डी- पत्थर का गोल आकर का एक उपकरण जो गहाई के काम आता है|
रहट- बैलों की मदद से कुएं से पानी निकालने का एक यन्त्र| 
धोरा/धाना- खेतों में पानी बहाने का नाला| 
सरकंडा/झूंडा/झूंड - एक प्रकार का पौधा जिस के तने और पत्ते छप्पर आदि बनाने काम में लिए जाते हैं| 
छाज- सरकंडे के उपरी हिस्से तुलियों से बना एक पात्र जो अनाज साफ़ करने के काम आता है| 
छालनी- लोहे से बना एक पात्र जो छानने के काम आता है| 
चाकी- पत्थर से बना आटा पीसने का यन्त्र| 
कीला- हाथ से चलने वाली चक्की का धुरा जिस पर ऊपरी पाट घूमता है| 
मानी- हाथ चक्की के ऊपरी पाट में लगने वाला लकड़ी का टुकड़ा जो कीले पर टिकता है| 
गरंड- हाथ चक्की का घेरा जिसमें पिसा हुआ आटा गिरता है| 
छिक्का- घी, दूध या रोटी रखने का रस्सी का जाला| पशुओं के मुंह पर लगने वाले जले को भी छिक्का कहते हैं|
रास- ऊंट की लगाम| 
हाथेली- हल का वह भाग जिसे पकड़ कर हल चलाया जाता है| 
चाक- लकड़ी का बना वह गोल चक्का जिस पर रस्सी चढ़ा कर कुंए से पानी निकाला जाता है| 
नोट- मिटटी के मटके आदि बर्तन बनाने का यंत्र भी चाक कहलाता है|
कहोड- ऐसी लकड़ी जो ऊपर दो हिस्सों में बंट जाती है और जिस पर चाक लगाकर कुएं से पानी निकाला जाता है| 
ढाणा- कुएं से चीड़स से पानी निकाल कर जिस हौद में डाला जाता है| 
खेल- पशुओं के पानी पीने की हौद| 
गूण- कुएं से पानी खींचते समय ऊंट या बैल जिस गढ़े में जाते हैं| 
मंडासा- कुएं के उपरी हिस्से पर बनायीं गयी दीवार|
बिटोड़ा- गोसे/ उपलों का व्यवस्थित ढेर|
पराली- चावल के पोधों का भूसा|
कड़बी- बाजरे/ज्वार के पोधों का भूसा|
तूड़ी- गेंहूँ/जौ के पोधों का भूसा|
नलाव/नलाई/निनान- फसल में उगी खरपतवार को निकलना|

Monday, 28 December 2015

हरियाणा की भौगोलिक स्थिति

हरियाणा की भौगोलिक स्थिति 

हरियाणा भारत के उत्तर-पश्चिम में 27.39' से 30.55' उ. अक्षांश और 74.28' से 77.36' पू. रेखांश के मध्य स्थित है| 
यमुना नदी वर्तमान हरियाणा की पूर्वी सीमा निर्धारित करके उत्तर प्रदेश से अलग करती है| पश्चिम में पंजाब और राजस्थान के भाग लगते हैं तो उत्तर के पंजाब का कुछ भाग तथा हिमाचल प्रदेश और शिवालिक की पहाड़ियां हैं| दक्षिण में राजस्थान प्रदेश और अरावली की पहाड़ियां हैं| 

क्षेत्रफल-

44212 वर्ग किलोमीटर

नदियाँ-

पूर्व में यमुना, उत्तरी हरियाणा में सरस्वती (जो लुप्त हो गई थी और खुदाई जारी है), दृषद्वती, आपगा, तांगड़ी, मारकंडा, घग्गर, अशुमती और दक्षिण में साहबी, कसावती (कृष्णावती) दोहान, इन्द्रौरी|

वर्षा-

अधिकतम 216 सेंटीमीटर (शिवालिक की तलहटी में)
न्यूनतम-25-38 सेंटीमीटर (दक्षिणी हरियाणा में)

फसलें-

हरियाणा में मुख्यतः दो फसलें होती हैं| 
1.रबी (असाढ़ी)-यह फसल सर्दी में होती है| अक्टूबर-नवम्बर में बोई जाती है और मार्च-अप्रैल में कटाई की जाती है| रबी फसल में गेंहू, जौ, चना, सरसों उगाये जाते हैं|
2. खरीफ (सावणी)-यह फसल वर्षा शुरू होने पर आमतौर पर मानसून सक्रिय होने पर जून-जुलाई में बोई जाती है और सर्दी की शुरुआत होने पर सितम्बर-अक्टूबर में काट ली जाती है| इसमें ज्वार, बाजरा, ग्वार, मूंग, मक्का, कपास आदि उगाये जाते हैं|
पानी की अच्छी उपलब्धता वाले क्षेत्रों में धान और गन्ना (ईख) भी उगाया जाता है|

वनस्पति-

हरियाणा के शिवालिक क्षेत्र में चीड, केले, सिरस, कचनार, खैर, बियुल, जिंगन, अमलतास और बयल जैसे पेड़ पाए जाते हैं|
कालका-मोरनी क्षेत्र में जामुन, महुआ, बहेड़ा, तुन, अर्जुन आदि पेड़ पाए जाते हैं|
हरियाणा के मैदानी इलाकों में शीशम, नीम, सिरस, पीपल, बड, लेसवा (लासूडा), आम, जामुन, इमली, सौंहजना ,सेमल आदि पेड़ पाए जाते हैं|
दक्षिण पश्चिम के शुष्क और रेतीले इलाके में जांटी (खेजड़ी), कीकर, बेरी, फिरास, बबूल, जाल, नीम, पीपल, बड जैसे पेड़ और कैर, थूहर जैसी झाड़ियों के अलावा खींप, आक, सरकंडा आदि पौधे भी पाए जाते हैं|

पशु-

हरियाणा में हिरन, स्याहगोश, खरगोश, गीदड़, लोमड़ी, नीलगाय (रोझ), लंगूर, बन्दर आदि जंगली और गाय, भैंस, (मुर्राह भैंस हरियाणा की प्रमुख नस्ल है), बैल, ऊंट, घोडा, गधा, खच्चर, सूअर, भेड़, बकरी, कुत्ते, बिल्ली आदि पालतू जानवर पाए जाते हैं|

पक्षी-

यूँ तो हरियाणा में स्थित पक्षी विहारों में कई तरह के प्रवासी पक्षी आते हैं लेकिन यहाँ मिलने वाले प्रमुख पक्षियों में कुञ्ज, कबूतर, कौआ, बतख, तोता, बुलबुल, गुरसल, घुग्गी, जंगली मैना, मोर, मुर्गी, बाज, गीद्ध, बगुला, तीतर, काला तीतर, सोन-चिडी, नीलकंठ, गौरया, डोमनी, काली चिड़िया, चमगादड़, उल्लू, आदि शामिल हैं| काला तीतर हरियाणा का राज्य पक्षी है|

जीव-जंतु-

हरियाणा में मेंढक, भुज, कछुए, सांप (काला, गुराहडिया, बिसून्डिया, धामन, दोमुंही, सटक, पदम, चमेलिया, दबोइया, बिलान्दिया), गोहे, गुहेरी, छिपकली, गिरगिट, सांडा, बिच्छू, कनखिजूरा, गिलहरी, नेवला आदि सृसर्प व् अन्य जीव-जंतु मिलते हैं|

खनिज- 

खनिज के मामले में हरियाणा संपन्न नहीं है| दक्षिणी हरियाणा के महेंद्रगढ़ तथा रेवाड़ी जिलों में अवश्य कुछ खनिज जैसे- चूना पत्थर, बजरी, संगमरमर, स्लेट, स्फटिक, शीशा, ताम्बा, अभ्रक मिलते हैं| इसी प्रकार दादरी के गाँव कल्याणा में संगे लरजा (हिलना पत्थर) मिलता है और गुडगाँव में चीनी मिटटी मिलती है| 


प्रश्न- हरियाणा के राज्य पक्षी का नाम बताएं।
उत्तर- काला तीतर।
प्रश्न- वह कौन—सा प्रदेश है जिसके सभी पर्यटन स्थलों के नाम पक्षियों के नाम पर रखे गये हैं?
उत्तर- हरियाणा।
प्रश्न- हरियाणा में काला हिरण प्रजनन केन्द्र कहां है?
उत्तर- पीपली (कुरुक्षेत्र) में।
प्रश्न- राष्ट्रीय उघान बोर्ड कहां स्थित है?
उत्तर- गुड़गांव (हरियाणा) में।
प्रश्न-सुल्तानपुर पक्षी विहार किस राज्य में स्थित है?
उत्तर-हरियाणा|

हरियाणा का वर्तमान परिदृश्य और जनसँख्या


हरियाणा का वर्तमान परिदृश्य 

जनसँख्या

जनसँख्या (2011 की जनगणना के अनुसार)-
253.53 लाख
पुरुष-135.05 लाख
महिलायें- 118.48 लाख
जनसँख्या घनत्व-573 प्रति वर्ग किलोमीटर
दस वर्ष का विकास-दर- 19.9 प्रतिशत
लिंगानुपात- 877 (1000 पुरुषों पर महिलाओं)
साक्षरता (प्रतिशत) (2011की जनगणना के अनुसार)
पुरुष- 85.4%
महिलायें- 66.8%
की कुल 76.6%

प्रति व्यक्ति आय

स्थिर कीमतों पर -59,188 से कम (2004- 2005 के आधार वर्ष पर)
मौजूदा कीमतों पर-92,327 से कम

कृषि

खाद्यान्न- 166.29 लाख टन का उत्पादन (2010-11)
गेहूं उत्पादन- 116.3 लाख टन
धान उत्पादन- 52.08 लाख टन
गन्ना उत्पादन- 60.42 लाख टन
तिलहन- 9.65 लाख टन
अधिक उपज देने वाली किस्में- 38.02 लाख हेक्टेयर के तहत कवर क्षेत्र।
प्रमाणित बीज- 972.3, 1000 क्विंटल
Fertilizers की खपत - 13.6 लाख टन
Fertilizers की प्रति हेक्टेयर खपत - 209.8 किलोग्राम
Tractors- 2.63 लाख

सकल राज्य घरेलू उत्पाद

स्थिर मूल्यों के आधार पर –Rs.149,568.01 (आधार वर्ष 2004-05)
मौजूदा कीमतों पर-रु 233309.7
पशुपालन (2011-12)
गहन पशु विकास परियोजनायें-07
पशु चिकित्सा अस्पताल / क्षेत्रीय कृत्रिम गर्भाधान केंद्र-942
पशु औषधालय / पशुपालक केन्द्र-1809
वीर्य बैंक -13

सहकार/COOPERATION (2011-12)

चीनी मिल-11
प्राथमिक भूमि विकास बैंक (विलय के बाद) -19
प्राथमिक सहकारी विपणन सोसाइटी की संख्या- 71

डेयरी विकास (2011-12)

प्रति व्यक्ति प्रति दिन दूध की खपत-680 ग्राम
दूध संयंत्र-05
प्रति दिन कुल हैंडलिंग क्षमता -8.4 लाख लीटर

शिक्षा (2011-12)

प्राथमिक विद्यालय- 13,111
माध्यमिक विद्यालय-3660
हाई स्कूल-3324
सीनियर सेकेंडरी स्कूल- 2667
कालेज-680
विश्वविद्यालय/यूनिवर्सिटीस-23
तकनीकी शिक्षा (2011-12)
पॉलिटेक्निक-187
इंजीनियरिंग कॉलेज-164
M.B.A. कालेज-176
M.C.A. कालेज-62
बी फार्मेसी कालेज-32
कुल सीटें-1,36,715
चिकित्सा शिक्षा (2011-12)
संस्थानों की संख्या- 05
कुल सीटें -600
व्यावसायिक शिक्षा (2011-12)
आईटीआई की संख्या - 123
I.T.Cs. की संख्या- 90
कुल सीटें-47,988

खाद्य एवं आपूर्ति (2011-12)

उचित मूल्य की दुकानें -9375
गेहूं की खरीद-68.91 लाख टन
धान की खरीद- 28.82 लाख टन

बिजली (2011-12)

गांवों का विद्युतीकरण-6764 गाँव
स्थापित क्षमता- 3730.5 मेगावाट
प्रति दिन बिजली उपलब्धता-1045 लाख यूनिट
नलकूप कनेक्शन-5,31,848
बिजली की प्रति व्यक्ति खपत (केवल उपयोगिता) - 941वॉट (2010-11)
बिजली उपभोक्ता-49.13 लाख
ग्रिड और पोल आधारित सब-स्टेशन- 3,65,263
पारेषण और वितरण लाइनों की सर्किट लंबाई -2,33,181किलोमीटर।
चालू संयंत्र-06
निष्पादन के तहत संयंत्र-01

वन (2011-12)

जंगल के तहत क्षेत्र -1594 वर्ग किमी।
साल के दौरान पेड़ लगाए -425 लाख

आवास (2011-12)

मकानों का निर्माण-66,190
आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों और निम्न आय वर्ग के लिए मकान-46,290

स्वास्थ्य (2011-12)

अस्पताल / सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र-164
प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र-441
उपकेन्द्र-2630
अस्पतालों में बिस्तरों की संख्या -10,180
आयुर्वेदिक होम्योपैथिक और यूनानी संस्थान-667
स्वास्थ्य और चिकित्सा सुविधाओं पर प्रति व्यक्ति व्यय आवंटन-रु.490.28

परिवहन (2011-12)

रोडवेज के बेड़े में बसें- 3469
बस स्टैंड-93
डिपो-21
प्रतिदिन तय की जाने वाली दूरी -10.35 लाख किलोमीटर
बसों में यात्रियों का दैनिक आवागमन-10.97 लाख

सड़क (2011-12)

पक्की सड़कों की लंबाई- 38,499 किलोमीटर।
पक्की सड़कों से जुड़े गांव-6764
सिंचाई (2011-12)
नहरों द्वारा सिंचित क्षेत्र -20.82 लाख हक्टेयर (2010-11)
जलमार्गों की लम्बाई -15840.3 किलोमीटर
फव्वारा सेट-119,289
ट्यूबवेल की संख्या और पम्पिंग सेट-6.97 लाख

उद्योग (2011-12)

पंजीकृत सूक्ष्म एवं लघु उद्योग-82,248
बड़ी और मध्यम इकाइयां- 1,357
निर्यात- 44,250 करोड़ रूपये (2010-11)

समाज कल्याण (2011-12)

आईसीडीएस परियोजनाओं की संख्या -148
आईसीडीएस कार्यक्रम के तहत लाभार्थियों की संख्या -14.48 लाख
विधवा पेंशन योजना के तहत लाभार्थियों की संख्या-521,461
शारीरिक रूप से विकलांग योजना के तहत लाभार्थियों की संख्या -135,901
वृद्धावस्था पेंशन योजना के तहत लाभार्थियों की संख्या-1361873

पेयजल आपूर्ति (2011-12)

पीने के पानी की सुविधा वाले गांवों/ढाणियों की संख्या-7385
आंशिक शहरी जलापूर्ति योजनाओं की संख्या-147

खेल (2011-12)

खेल परिसर-23
खण्ड स्तरीय खेल स्टेडियम-201
गांव में स्टेडियम-241

पर्यटन (2011-12)

पर्यटक परिसरों की संख्या -43